मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे – मेरा अनुभव

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मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे, ये सिर्फ और सिर्फ मेरा अनुभव बता रहा हु. किसी भी हालत में ये क्लेम नहीं कर रहा की आपको भी ऐसा  करना चाहिए। आप अपने चिकित्सक से परामर्श ले सकते है या स्वविवेक से निर्णय ले सकते  है.

में सिर्फ वो लिख रहा हु जो मेरा अनुभव रहा है. जो मैंने रिसर्च में समझा और जो मुझे लगा की एक पेशेंट होने के नाते मुज़से झूट बोला गया.

मेरी यात्रा की शुरुआत

कुछ भी आगे लिखू उसके पहले ये फिर से साफ़ कर देना चाहता हु की आज भी चिकित्सीय जगत में डायबिटीज का कोई ऑफिशियल इलाज नहीं माना जाता। हां ये जरूर है की बहुत से चिकित्सक और रिसर्च-करता अब ये मानते है की मधुमेह टाइप 2 रिवर्स की जा सकती है.

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे इस बात पर मतभेद हो सकते है पर ये संभव है इसमें अब कोई मतभेद नहीं।  मैंने किया इसलिए बोल सकता हु.

मेरी डायबिटीज से लड़ाई की यात्रा अपक्षाकृत कठिन रही है. इसमें बहुत ज्यादा कंसिस्टेंसी और पेशेंस की जरूरत पड़ती है.

ये एक दिन या एक महीने की प्रोसेस नहीं। बल्कि यह पूरी जीवन पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन की मांग करता है.

दवाइयों से छुटकारा और स्वस्थ होने की उत्कंठ इच्छा बहुत जरूरी है.

जो लोग ये जानते है की मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे वो जल्दबाजी में मेहनत छोड़ देते है या मायूस हो जाते  है. पर अगर आप इस रास्ते पर चले है तो यकीन मानिये  धैर्य ही एक कुंजी है.

मधुमेह के लक्षणमैं 8 साल से अधिक समय से मधुमेह टाइप 2 से पीड़ित था । यह सब २०१० में शुरू हुआ था । 2018 में मैंने काफी शोध के बाद इसे पलटने की प्रक्रिया शुरू की।

२०१८ में मैंने एक वीडियो देखा।  उसने मेरी सोचने की दिशा बदल दी.

मुझे उस वक्त तक स्ट्रोक (लकवा) हो चूका था और उसके पीछे का मुख्य कारण डॉक्टर ने डायबिटीज बताया।

साथ ही में चैन स्मोकर था. दिन में २० सिगरेट पीना मेरे लिए सामान्य था. और उम्र ५० के पास हो रही थी.

ब्लड प्रेशर मेरा २००/१२० सामान्य तौर पर रहने लगा  था. वजन १०२  किलो। जबकि सामान्य वजन मेरा ७० से नीचे ही होना चाहिए।

आप सोचिये कितनी दवाइया कोई इंसान ले सकता है.

और साथ में अगर आप अकेले ही अपने परिवार में कमाने वाले हो तो बच्चो और परिवार के भविष्य की चिंता होना स्वाभाविक है. और ये चक्र आपको और अधिक दुखी और फ़्रस्ट्रेट कर देता है.

खैर आगे बढ़ते है.

ऐसी बुरी शारीरिक और मानसिक स्थिति का जिम्मेदार में खुद था. इसके लिए किसी को दोष देना गलत होगा. स्ट्रगल सबके जीवन में है.

महत्वपूर्ण : आपको अपने आप से प्रेम करना शुरू करना पड़ेगा। आपका शरीर इसकी पहली सीडी है. शरीर स्वस्थ है तो बहुत कुछ झेल सकते है.

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे – शुरुआत कैसे करी ?

जैसा मैंने कहा की २०१८ की शुरुआत में मैंने एक वीडियो देखा जिसने मुझे प्रेरित किया। और मैंने पूरे दस दिन इंटरनेट पर इस बात पर ही रिसर्च किया।

में ढूंढ रहा था कोई तगड़ा रिसर्च और साइंटिफिक बेस जो ये सिद्ध कर दे की डायबिटीज टाइप २ ठीक किया या रिवर्स किया जा सकता है.

और आखिर मुझे मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे पर बहुत से पुख्ता रिसर्च मिल गए. पर एक मजेदार बात ये निकली की रिसर्च एक पार्ट में नहीं था. अलग अलग रेसर्चेस थे जो ये साबित कर रहे थे की मधुमेह टाइप 2 रिवर्स या पलटी जा सकती है.

और जो पता चला वो भयावह था. कम से कम मेरे लिए तो . जो ७-८ वर्षो से मेरा डायबिटीज का इलाज चल रहा था, वो मेरी समस्या या बीमारी बढ़ने में ही मदद कर रहा था. मैं दवाइयों से ठीक होने की बजाय और अधिक बीमार हो रहा था.

मतलब मेरी दवाईया ही मेरी बीमारी बढ़ा रही  थी. ये सुन कर आप भी चौंके होंगे और शायद इतनी आसानी से विश्वास नहीं  करेंगे.

और में ये फिर से साफ़ साफ़ कह दू की न तो में कोई चिकित्सक हु और न ही मेरी बाते मेडिकल साइंस के लिए कोई मायने रखती है. ये विशुद्ध अनुभव और मेरी सोच है.

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे इस बात को समझने से पहले हमे कुछ मूलभूत बातो का ध्यान रखना पड़ेगा। तो शुरू करते है स्टेप बाई स्टेप मैंने क्या किया।

तो चलिए हम उन चीजों से शुरुआत करते हैं जो हम आमतौर पर जानते हैं ।

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (एडीए) के अनुसार उस समय मधुमेह टाइप 2 का इलाज नहीं था। वे इसे तब भी शायद एक क्रोनिक प्रोग्रेसिव डिजीज ही बोलते थे.

इसका मतलब ये होता है की इसका कोई इलाज नहीं और ये जीवन भर बढ़ती ही जाएगी.

हारवर्ड मेडिकल स्कूल प्रकाशन के हिसाब से उस वक्त तक इसे एक बिना इलाज वाली बीमारी ही मन गया था. []

मेरे डॉक्टर ने भी ये ही कहा था की अब इसका कोई इलाज नहीं। बस दवाइया खाते  रहो और खान पान का ध्यान रखो. और थोड़ी एक्सरसाइज करो. सिगरेट छोड़ो।

पर दवाई नहीं छोड़ना।

मधुमेह के इलाज की योजना बनाने से पहले प्री-डायबिटिक स्थितियों को जानें।

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे का जवाब इसमें ही छिपा है.

मेरी रिसर्च से मुझे एक बात तो समझ आ गयी की मैं रातोरात अचानक टाइप २ डायबिटिक नहीं बन गया. मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे इसको समझने के पहले आपको ये समझना जरूरी है की आप कई वर्षो तक प्री-डायबिटिक रह सकते है.

प्री-डायबिटिक वो स्थिति होती है जब आपका रक्त ग्लूकोस सामान्य से ज्यादा रहता है. पर इतना ज्यादा नहीं रहता की आप डायबिटिक कहलाये।

प्री-डायबिटिक और फिर डायबिटीज टाइप 2 के चरण

प्री-डायबिटिक  स्थिति तो आप समझ गए है. पर अगर आप अपनी आदते नहीं सुधरते या उन स्थितियों को नहीं बदलते जिनकी वजह से आप प्री-डायबिटिक है तो मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे पर सोचना बंद कर दे.

क्योकी उन स्थितियों के रहते आपको डायबिटीज पक्का होगी.किसी को कुछ महीने में ही हो जाती है और कुछ लोग सालो तक प्री-डायबिटिक रह कर एक डायबिटिक बनते है.

मुझे  डायबिटीज का पता कैसे चला?

मेरे पिताजी को ५७ की उम्र से डायबिटीज है. उस वक्त उनकी उम्र थी ७० वर्ष और वो दिन में दो तीन बार इन्सुलिन और दवाइया लेते थे.

वो बहुत कम उम्र में फ़ौज में भर्ती हो चुके थे. जीवन परिश्रम से भरा हुआ था. और शारीरिक रूप से बिलकुल चुस्त और  फिट थे. जैसा एक फौजी को होना चाहिए। रिटायरमेंट के बाद जरूर उनकी दिनचर्या में फर्क पड़ा और शायद इस वजह से ही वो मधुमेह का शिकार हो गए .

खैर, हर महीने की तरह वो डॉक्टर के पास रूटीन चेकउप के लिए गए थे. डॉक्टर के यहाँ मशीन से शुगर चेक की जाती  थी.तो लगे हाथ मैं भी अपनी शुगर चेक करवा  ली.

मेरी शुगर उस वक़्त रैंडम १७० आयी. और ब्लड टेस्ट करने वाले अस्सिटेंट ने मुझे  डॉक्टर से सलाह लेने के लिए कहा. उसके हिसाब से में भी डायबिटिक हो चूका था.

जाहिर है डायबिटीज के बारे में हम जितना जानते है और जितना भय लगता है वो काफी था की मैं भी डॉक्टर से बात करू.

मुझे जो पहली दवाई लिखी गयी वो थी मेटफोर्मिन।  इसपर मैंने विस्तार से चर्चा की है. आज की जो मेरी समझ है उस हिसाब से तो मेटफोर्मिन से ही इस बीमारी को बढ़ावा देने की शुरुआत हो जाती है.

खैर, इसपर में कोई टिपण्णी करू उसके पहले ये बता दू की मेटफोर्मिन का काम ही रक्त से शुगर हटा कर आपके लिवर और मसल्स में स्टोर करना होता है. मतलब माल रफा दफा.

स्थिति कैसे बिगड़ी?

शुरूआती वक्त में मैंने इसपर बहुत ध्यान दिया। समय से दवाइया खाई. रोज थोड़ा चलना शुरू किया, खाना समय पर और छोटे छोटे हिस्से में खाना शुरू किया। दिन में ५-६ बार छोटे हिस्से में खाना खता था. सारा ध्यान इस बात पर था की किसी भी स्थिति में ब्लड में ग्लूकोस ना बढ़े.

कुछ महीनो बाद रूटीन बन गया. साल भर बाद फिर शुगर ज्यादा रहने  लगी.

एक समय तो २५० के पार चली गयी  थी. फिर डॉक्टर ने शरीर में इन्सुलिन भढने वाली दवाइया लिख दी.

फ़ास्ट फॉरवर्ड २०१७  स्थिति सुधरने की जगह बिगड़ती चली गयी. और जीवन में काम की वजह से तनाव अलग था. सबके जीवन में होता है.

पर हां, मेरा चलना फिरना बंद हो गया था लगभग। कभी कभी सुबह टहल लिया करता था पर काम की इतनी व्यस्तता थी की अक्सर उठने के बाद तैयार हो कर ऑफिस चला जाता था. और  देर रात घर वापस आता था.

आखिर जब इतनी महंगी दवाइया चल रही है तो दर किस बात का.

जीवन का सबसे बड़ा झटका

मुझे स्ट्रोक हुआ. आम भाषा में कहे तो दिमाग में खून का थक्का जम गया और मेरे शरीर का बयां (left) हिस्सा लकवा ग्रस्त होगया। लकवा बहुत अधिक गंभीर नहीं था.

पर आप सोचिये। जब आपके बच्चे स्कूल में पढ़ रहे है, कमाने वाले आप अकेले तो कौन चाहेगा की पैरालिसिस हो जाये. बहुत बुरी स्थ्तिति  थी.

और डॉक्टर्स ने मुझे बताया की शुगर एक सबसे महत्वपूर्ण कारण है इस स्ट्रोक या लकवे का.

तो अगर आपको शुगर है तो आप आज ही जग जाओ. मेरे जैसे बुरी स्थति में पहुँच कर जागोगे तो हो सकता है बहुत देर हो जाये।

आगे बढ़ते है.

लकवे ने मेरी आंखे खोल दी.

मुझे एक बात उस वक़्त तक नहीं समझ नहीं आ रही थी की दवाइया समय पर लेने के बावजूद मेरी स्थिति ऐसी क्यों हुई.

मेरा एक ही लक्ष बन गया की मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे या ठीक करे. तब तक तो खैर मुझे ये नहीं मालूम था डायबिटीज रिवर्स भी होती है. में तो इंटरनेट पर डायबिटीज का इलाज नाम से ही खोज करता था.

और उस वीडियो ने मेरी सोचने की दिशा बदल  दी. वो वीडियो कुछ हद तक ही ठीक था. इसलिए मैं उसका लिंक यहाँ शेयर नहीं करूँगा. क्योकी उसमे भी कुछ ऐसी बाते कही गयी जो गलत साबित हुई.

उदहारण के लिए फल फ्रूट की डाइट को उस वीडियो में सही बोला गया था. जबकि फल फ्रूट में फ्रुक्टोस बहुत अधिक होता है. वो अचानक आपके रक्त में ग्लूकोस नहीं बढ़ता। पर लिवर में स्टोर हो जाता है और फिर बाद में खून में शक्कर बन कर बहता है. चौंक गए ?

नीचे और अधिक चौंकाने वाली बाते पढ़ेंगे। दुनिया उल्टी दिखाई देगी।

स्ट्रोक के बाद की स्थति

मेरे शुगर लेवल उस वक़्त 9.4 का एचबीए1 सी था। और लगभग 250 का औसत ग्लूकोज स्तर और कभी-कभी यह 300 के आसपास पहुंच जाता है। आपको अगर शुगर है तो आपको ये मालूम होगा की एचबीए1 डायबिटीज  जाानने का सबसे सही अचूक तरीका है.

आप अगर रोज रक्त जाँच करेंगे सामान्य ग्लूकोस लेवल के लिए, तो कभी आपकी ग्लूकोस सामान्य आएगी, कभी ज्यादा और कभी बहुत  ज्यादा. तो ये समझ लीजिये की ऐसा होना सामान्य है. जैसा २४ घंटे ब्लड प्रेशर एक सामान नहीं होता वैसे ही ब्लड ग्लूकोस लेवल भी हमेशा एक सामान नहीं होता।

नीचे मेरी रिपोर्ट की स्क्रीनशॉट है. उसमे आप देखेंगे की मेरा एचबीए1 ९.४ था. जो की बहुत ज्यादा बुरी स्थति थी. अब मेरा एचबीए1 ज्यादा से ज्यादा ६ के आस पास होता है. वो भी अगर में कुछ हफ्ते अपने खान पान पर ध्यान ना दू तो. ऐसा अक्सर कम ही होता है.

मधुमेह होने के मापदंड

मैंने क्या किया उसके बाद ?

प्री-डायबिटिक के लक्षण

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे इस बात को समझने के पहले आईये समझते है की आप प्री -डायबिटिक रहते हुए कैसे पता कर सकते है की आपको डायबिटीज होने वाली है. तो ये है प्री -डायबिटिक होने के लक्षण।

  1. बार बार प्यास लगना या गला सूखा रहना
  2. पूरा खाना खाने पर भी संतुष्टि नहीं। या अत्यधिक भूख।
  3. शरीर में ऊर्जा न होने जैसे लगना।  मनो हमेशा शरीर थका हुआ रहता हो.
  4. पेशाब ज्यादा आना और तेज आना. जितना ज्यादा डायबिटीज उतना तेज पेशाब आता है.
  5. दृस्टि में बदलाव। धुंदलापण एक सामान्य लक्षण है.
  6. इंसुलिन प्रतिरोध में वृद्धि के साथ उच्च रक्तचाप आता है। मेरा सामान्य रक्तचाप 200/120 था । तो ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहे तो शुगर जरूर चेक करवाए।
  7. उच्च कोलेस्ट्रॉल का स्तर। आप मेरी रिपोर्ट देख सकते हैं। मेरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक था। विशेष रूप से एलडीएल जो, खराब कोलेस्ट्रॉल हैं।
  8. ट्राइग्लिसराइड्स सीमा से बाहर एक और प्रमुख लक्षण है।

आप प्री डायबिटिक कब और कैसे बन जाते है ? 

इसका कोई सटीक कारण नहीं है कि आप प्री-डायबिटिक क्यों बन जाते है.  इसको समझने के लिए आपको एक व्यापक दृष्टिकोण रख कर समझना पड़ेगा। एक या अनेक कारण मिल कर आपको इस स्थिति में ला सकते है.

मैंने नीचे कुछ कारण बताये है.

पर हमेशा एक बात ध्यान रखिये। डायबिटीज को आप इन्सुलिन रेजिस्टेंस या इन्सुलिन प्रतिरोध बोलना और माना शुरू कर दीजिये| इससे ही सोच में फर्क पड़ेगा। आपका ध्यान ग्लूकोस से ज्यादा इन्सुलिन बढ़ने पर होना चाहिए।

कमर के आकार में वृद्धि:

ये सबसे पहला और महत्वपूर्ण संकेत है. और बहुत ज्यादा सामान्य। कोई ध्यान नहीं देता.

कमर का आकार घटाने  पर हमेशा ध्यान दे. इससे ही बहुत कुछ स्थिति सुधर जाएंगी।

इन्सुलिन एक फैट हॉर्मोन है.

ये बात समझना बहुत जरूरी है की इन्सुलिन एक फैट हॉर्मोन  है.

मैंने इसको विस्तार से समझाया है नीचे। आपके शरीर में जितना अधिक इंसुलिन होगा उतना ही अधिक वसा जमाव आप देखेंगे। ज्यादातर समय यह कमर के आसपास ही रहता है।

त्वचा के ठीक नीचे जमा होने वाला फैट साफ नजर आता है। आप दर्पण के सामने अपनी कमर देखकर इसे नोटिस कर सकते हैं। इसे सुब क्यूटेनियस वसा कहते  है.

पर जो वसा ज्यादा खतरनाक होता है वो होता है विसरल फैट. ये ऑर्गन्स के आस पास जमा होता है. पैन्क्रीआज के ऊपर भी ये फैट जमा होता है और आगे चल कर इन्सुलिन बनना बंद कर देता है.

जैसा की मैंने ऊपर बताया की इन्सुलिन रेजिस्टेंस की वजह से शरीर ज्यादा इन्सुलिन बनता  है.और जब इन्सुलिन ज्यादा बनता है तो फैट भी ज्यादा जमा होता है. इसलिए पेट पर ध्यान  दे.

गतिहीन जीवन शैली।

ये आज के समय में सबसे बड़ा कारन है. न तो हमारी शारीरिक मेहनत होती है और ना ही हम कुछ ऐसा करते है की शरीर में कैलोरीज अधिक जले.

साथ ही काम का तनाव इतना ज्यादा होता है की हम दिन भर तनाव के चक्कर में बहुत कुछ खा लेते है. और अधिकतर उसमे वसा और कार्बोहाइड्रेट्स ज्यादा होते  है.

तो ये सब मिला कर भी शरीर में इन्सुलिन रेजिस्टेंस पैदा करते है.

अपने खाने पर ध्यान दो.

हमारे शरीर को ऊर्जा बहुत से स्रोतों से मिलती है. ऊर्जा को हम कैलोरीज में मापते है.

तो जो कैलोरीज हमें मिलती है आजकल वो अधिकतर कार्बोहायड्रेट से मिलती है. चावल, रोटी तो हम पहले भी खाते  थे.पर आजकल बर्गर, पिज़्ज़ा, कोल्ड ड्रिंक्स इत्यादि हमारे शरीर में अलग से कैलोरीज डाल रहे है.

मजेदार बात ये है की कुछ लोग शक्कर छोड़ देते है पर कार्बोहायड्रेट नहीं छोड़ते. और कार्बोहायड्रेट शरीर में जाते से ही शक्कर बन जाता है.

तो कार्बोहायड्रेट कम खाइये और दिन भर जो कहते है उसपर ध्यान दीजिये।

वंशानुगत कारण

जैसा कि मेरे मामले में हुआ, मेरे पिता को डायबिटीज था. तो मुझे भी डायबिटीज होने की चान्सेस बढ़ गए.

पर ये  भी उतना ही सच है की अपनी जीवन शैली सुधार के रखता तो मुझे कभी मधुमेह टाइप 2 नहीं होता.

मेटाबॉलिज्म का  स्तर

आपने बहुत बार देखा होगा की आपका दोस्त जो  दुबला पतला है वो आपसे भी ज्यादा खाता है. पर मोटा नहीं होता।

आप उससे आधा भी खाओ तो भी मोठे होते रहते हो.

ऐसा इसलिए होता है क्योकी आपका मेटाबोलिज्म उससे स्लो है.

तो आपको ऐसे में अपना मेटाबोलिज्म बढ़ने पर ध्यान देना चाहिए।

धूम्रपान करने वाले अधिक रिस्क में होते है.

धूम्रपान करने वाले सबसे ज्यादा रिस्क में होते है. शुगर जरूरी नहीं की धूम्रपान से हो पर धूम्रपान की वजह से बहुत से ऐसे कारन उत्पन्न होते है जो आपको प्रे डायबिटिक बना सकते है.

कम नींद

नींद बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। कम नींद की वजह से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन या तनाव हॉर्मोन की वृद्धि  .उससे भी मोटापा बढ़ता है.

मेरे इलाज की प्रथम सीढ़ी

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे पर अब हम बात कर सकते है. क्योकी बेसिस आप समझ है.

जब मेरा लगभग १० साल पहले इलाज शुरू हुआ तब मुझे ये बताया गया था

१- शक्कर बिलकुल बंद.

२- इन्सुलिन बढ़ने या ब्लड ग्लूकोस कम

३- दिन में कई बार थोड़ा थोड़ा खाना है.

४- डाइट प्लान में मुझे ६०:२०:२० का अनुपात रखने को बोला गया. जिसमे ६०% कार्बोहाइड्रेट्स और २०-२०% फैट और प्रोटीन।

५- और दिन में ३० मिनट चलना

जैसे में बता ही चूका हु की शुरुआत मेटफोर्मिन से हुए और फिर बाद में अन्य दवाये जोड़ी गयी.

और यकीन मानिये। इनमे से तीन बाते ऐसी थी जो मेरी स्थिति और बिगाड़ रही  थी.और सबके साथ ये ही हो रहा है.

अब में एक एक करके समझाता हु और शायद इससे आपकी  आंखे खुल जाये।

डायबिटीज का पता चलते ही सबसे ज्यादा जोर सही खाने पर होता  है. आपको डॉक्टर एक डाइटिशन से मिलने को कहते है और डाइटिशन कुछ इस तरह का प्लान बताता है.

जो डाइट प्लान मुझे दिया गया वो इस प्रकार था.

नोट: यदि आप सच्चाई जानते हैं तो आप इसका पालन नहीं करेंगे।  यह मुझे बाद में समझ आया.

1- सुबह बिना शक्कर की चाय। चीनी? कभी नहीं
2- नाश्ता, ज्यादातर प्रोटीन जिसमें अंकुरित अनाज, आदि शामिल होते हैं।
3- दोपहर का भोजन – मुझे जितना संभव हो उतना चावल छोड़ने के लिए कहा गया था। बिना घी के केवल दो से तीन चपाती। किसी परांठे की इजाजत नहीं। दोपहर के भोजन में सब्जियां शामिल होनी चाहिए, दाल, सलाद इत्यादि।
4- चाय के साथ शाम का नाश्ता। स्नैक्स में नामकीं चलेंगे या फाइबर युक्त बिसकिट्स।
5- रात का खाना लगभग दोपहर के भोजन के समान होता है लेकिन इसमें सलाद को अधिक मात्रा में शामिल करना चाहिए।
6- दिन में एक बार थोड़े से बादाम या अखरोड इत्यादि।

कुल मिला कर दिन में ६ से ७ बार कुछ खाना पीना था.  

और इतना सब इसलिए ताकि शरीर में ग्लूकोस न बढ़े. कैलोरीज पर ध्यान रहे.

और हो उलटा रहा था.

मेरी रिसर्च में मुझे मालूम चला की ये जो डाइट प्लान मैं  फॉलो कर रहा था वो ही मुझे और ज्यादा बीमार कर रहा था.

जैसा मैंने ऊपर कहा समस्या मेरी ग्लूकोस नहीं थी. समस्या की जड़ इन्सुलिन था. जितनी बार भी शरीर में इन्सुलिन बढ़ेगा उतना ज्यादा शरीर इन्सुलिन के प्रति रेसिस्टेंट होगा या यु कहे प्रतिरोध बढ़ाएगा।

तो जो में पहले २-३ बार खता था अब में ६-७ बार खा रहा  हु.मतलब अब मई पहले से दो गुना ज्यादा अपने शरीर में इन्सुलिन बढ़ने की प्रक्रिया कर रहा हु.

होना उल्टा चाहिए। जो मैंने आगे जा कर किया भी.

इन्सुलिन की मार से शरीर को बचाना। उसके लिए मैंने सिर्फ दो बार खाना शुरू किया। भर पेट खाता था.

और जो कुछ भी खाता था वो दिन के ६  घंटो में खा लेता था. तो जाहिर है बाकी के १४ घंटे मेरे शरीर में इन्सुलिन का स्तर नहीं बढ़ता था. शरीर को इन्सुलिन की मार बार बार झेलने की जगह अब सिर्फ दो बार झेलनी पड़ती थी वो भी सिर्फ ६ घंटो के अंदर।

इस प्रकार के खाने के तरीके को इंटरमिटेंट फास्टिंग बोलते है. इसपर मैंने अलग से लेख लिखा है इस साइट पर.

डायबिटीज में इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे।

जैसे मैंने कहा आपका पूरा जोर शरीर में बार बार इन्सुलिन न बढ़ने देने पर होना चाहिए। तो उसके लिए आप क्या करेंगे.

१- या तो आप एक दो बार में ही दिन का पूरा खाना खा लेंगे।

२- या फिर आप बाकी समय ऐसा खाएंगे जिससे शरीर में इन्सुलिन ना बढ़े.

मैंने दोनों काम किये। क्योकी शुरुआत में आप १४ घंटे भूखे नहीं रह सकते। तो मैंने अपनी भूख मिटने ने के लिए सुबह एप्पल साइडर विनेगर लेना शुरू किया. साथ ही मई उन १४ घंटो में २ बार कॉफी पीटा था ताकि भूक पर कण्ट्रोल रहे और मेटाबोलिज्म भी बढ़े.

और जो अभी डाइट प्लानर्स कर रहे है या डॉक्टर्स कर रहे है वो उल्टा है. क्योकी जैसे मैंने कहा समस्या इन्सुलिन है. और आप जो दवाई खा रहे हो वो इन्सुलिन बढ़ने का काम करती है. और इन्सुलिन बढ़ेगा तो डायबिटीज और बढ़ेगी। तो अगली बार डॉक्टर आपको और ज्यादा स्ट्रांग दवा देगा. और ये चक्कर चलता रहता है.

एक मशहूर डॉक्टर है जिन्होंने इंटरमिटेंट फास्टिंग और डायबिटीज रेवेर्सल पर दुनिया की आंखे खोली. डॉ. फंग अमेरिका में एक मशहूर नाम है. उनहोने हज़ारो पेशेंट्स का डायबिटीज रिवर्स किया  है. “दवाई के बिना या दवाई कम कर के “.

डॉ फंग एक लेख []  में लिखते है.

सच्चाई की पहली झलक तब पता चला जब मैंने डॉ फंग को पढ़ा.

वह लेख में निम्नलिखित कहते है जिसका अनुवाद मैंने नीचे दिया है.

इन्सुलिन रेजिस्टेंस कैसे होता है

“जब इंसुलिन का स्तर एक लंबी अवधि के लिए ऊंचा रहता  हैं, तो वो लिवर या जिगर को ग्लूकोस और फैट से भर देता है. एक फुले हुए गुब्बारे की तरह. और जब लिवर में इतना दबाव बन जाता है की वो ग्लूकोस और अधिक नहीं स्टोर कर सकता तो ग्लूकोस रक्त में रह जाता है. इसी को हम इन्सुलिन रेजिस्टेंस कहते है.  “

और फिर इस लेख में ही वो आगे कहते है जिसे अगर आप समझ गए तो ये पूरा गोरख धंदा बंद हो  जायेगा.

इसका मोटा मोटा अनुवाद होता है इस प्रकार।

“जिगर फैट को शरीर के दुसरे हिस्सों में जमा करने में बिजी हो जाता है. इस प्रक्रिया में वो पैंक्रियास पर भी फैट जमा कर देता है और अंततोगत्वा पैंक्रियास को पूरी तरह क्लोग या बंद कर देता है. इन्सुलिन बनाना बंद हो जाता है. ये लिवर द्वारा एक सुरक्षात्मक कदम है. क्योकी हाई इन्सुलिन मधुमेह टाइप 2 का मुख्य कारन है, और इन्सुलिन घटा कर उससे बचा जाना एक सुरक्षात्मत कदम है “

अब आप समझे।

जो आपको दवाई दी जा रही है, जो  जा रहा है वो ठीक उल्टा असर कर रहा है. वो आपके लिवर में और अधिक ग्लूकोस ठूंस रहा है. और आपकी पैंक्रियास को बंद करने की कगार पर ली जा रहा है.

तो आपका पहला कदम ६-७ बार छोटा छोटा खाने की जगह ५-६ घंटो में पूरा खाना खा लेना होना चाहिए। 

लेकिन, डॉ फंग ने जो कहा, आंखे  खोलने वाली और बहुत महत्वपूर्ण जानकारी थी. इसपर मैंने और अधिक शोद किया। तो दूसरी खतरनाक बात पता चली.

और वो थी मुझे  दी जाने वाली दवाई। और आखिर के कुछ महीने जो मैं इन्सुलिन ले रहा था.

दवाई जो इन्सुलिन बढ़ा कर मेरी स्थिति खराब कर रही थी.

आप ये बात तो समझ गए की आपको इन्सुलिन नहीं बढ़ने देना। पर जो दवाई दी जा रही थी या जो सीधा इन्सुलिन शरीर में इंजेक्ट कर रहा था वो सब शरीर में इन्सुलिन ही बढ़ा रहे थे.

इसलिए मैंने डॉक्टर से सलाह लेने की बात सोची।

पर आश्चर्य की बात की डॉक्टर के एक सिरे से ये रेसर्चेस और सच्चाई ख़ारिज कर  दी.उन्होंने साफ़ कह दिया की जो भी मैं करूँगा उसकी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मेरी  रहेगी.

तो फिर मैंने एक साधारण सा उपाय किया।

पहले मैंने इन्सुलिन अलग से लाना तुरंत बंद कर दिया।

ये तो मालूम ही था की शक्कर, कार्बोहायड्रेट या प्रोटीन खाने से शुगर बढ़ेगी। इसलिए मैंने शक्कर और कार्बोहायड्रेट पूरी तरह बंद कर दिया.

मैं सिर्फ सलाद, अंडा, अंकुरित चने, मुंग इत्यादि और घी मक्खन पर ही अपना पूरा डाइट प्लान लेने लगा. मतलब कार्बोहायड्रेट, दूध, और मीठा टटोल बंद.

नतीजा क्या निकला?

पहले हफ्ते के तीसरे दिन मुझे  शाम को चक्कर आ  गए. ह्यपोग्लाइसेमीक स्थति। शरीर में शुगर कम हो गयी. जबकि इन्सुलिन बंद किये सिर्फ तीन दिन हुए थे.

मतलव साफ़ था. जो गोलीया मैं ले रहा था उनसे ही मेरा इन्सुलिन लेवल शरीर में बढ़ रहा था और मेरी स्थिति खराब से और अधिक खराब हो रही थी.  तो मैंने दूसरे हफ्ते के पहले दिन से ही गोलिया भी बंद कर दी. बस मेटफोर्मिन की गोली दिन में दो बार चालू राखी।

तीसरे हफ्ते मैंने रोज बिना भूले ४-५ किलो मीटर चलना शुरू कर  दिया.दिन में, या शाम में या रात में. जब समय मिलता है तब ही चलता  हु.पर एक साथ ४-५  किलोमीटर.

अब तो मैं १०किलो मीटर चलता  हु.पर तब शुरुआत थी और पहला दिन तो बहुत मुशील भरा था. पर डटे  रहना जरूरी है.

और तीसरे हफ्ते के अंत तक मैं दवाईयों से छुटकारा पा चुका था.

चौथे और पांचवे हफ्ते काफी कठिनाइयों भरे गए. मैं दिन में ६-७ बार अपना ग्लूकोस चेक करता था. कार्बोहायड्रेट बंद कर दिया था तो अचानक ग्लूकोस बढ़ने का सवाल नहीं उठता। पर हम सब जीवन में पहला अन्न का ग्रास कहते है वो कार्बोहायड्रेट से भरा होता है. हमारे शरीर को आदत होती है कार्बोहायड्रेट की.

मुझे पूरे सात महीने लगे डायबिटीज रिवर्स करने में.

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे का जवाब तो मैं अभी भी पूरा नहीं दे सकता. क्योकी मैं डॉक्टर नहीं। इसलिए जो बोलूंगा वो रिसर्च के आधार पर ही बोल सकता हु.

और रिसर्च मुझे ये बताता है की हमारे साथ धोखा किया जा रहा है.

नीचे मैंने एक एक करके हर बात पर से पर्दा हटाया है. कैसे हमें दवाइयों से परमानेंट मरीज बनाया जाता है. कैसे हमें दवाई खाने पर मजबूर किया जाता है. आप खुद ही पढ़िए और निर्णय लीजिये।

और जो जानकारी दी गयी है वो आपको डायबिटीज रेवेर्सल में मदद ही करेगी।

डायबिटीज की दवाइयों से मोटापा क्यों बढ़ता है?

जो मुझे दवाई दी  गयी,जो इंजेक्शन लगे वो सब इन्सुलिन बढ़ा रहे थे. और साथ में बढ़ रहा था मेरा वजन. और कारण बाद में मालूम हुआ.

एक स्टडी[] कहती है की

इंसुलिन मोटापे का कारण बनता है! आप इंसुलिन से डायबिटीज का इलाज नहीं कर सकते। हर इन्सुलिन प्रिस्क्राइब करने वाला डॉक्टर ये जानता है.”

आपने कभी लिपो ह्य्पेर्ट्रोफी का नाम सुना है. जो लोग इन्सुलिन का इंजेक्शन लेते है उन्हें शायद मालूम हो.

जिस जगह इन्सुलिन का इंजेक्शन लगाया जाता है पेट पर या कही और चमड़ी के नीचे, तो वह एक सूजन बन जाती है. वो इसलिए बनती है क्योकी इन्सुलिन लेने वाली जगह पर फैट जमा होने लगता है.

वो गांठ फैट की गांठ होती है. तो जब शरीर में ज्यादा इन्सुलिन होगा तो आप सोचो चर्बी कहा कहा नहीं जमेगी।

और फिर एक प्रसिद्ध परीक्षण है [3]। एक नैदानिक परीक्षण जो उसी दिशा की ओर भी इशारा करता है

मधुमेह नियंत्रण और जटिलताओं के परीक्षण में प्रकार 1 मधुमेह के साथ शरीर के वजन और वयस्कों की संरचना पर गहन मधुमेह उपचार का प्रभाव का अध्यन किया गया. जिसके नतीजे निम्न प्रकार से थे.

इंसुलिन शरीर का वजन बढ़ाता है

क्या इंसुलिन से वजन बढ़ता है?

इसका क्या मतलब है?

इसका मतलब यह है कि आपके शरीर में इंसुलिन जितना अधिक होगा, उतना ही वसा का जमाव होगा।

पर वजन बढ़ने से तो डायबिटीज और अधिक बिगड़ जाती है. ये तो हम सब जानते है. तो फिर मुझे इन्सुलिन के इंजेक्शन और इन्सुलिन बढ़ने वाली दवाइया क्यों दी गयी?

खाना दिन में कई बार नहीं बल्कि एक या दो बार ही खाना चाहिए.

जैसे मैंने ऊपर बताया की डाइटिशन ने मुझे दिन में ६-७ बार छोटे छोटे हिस्सों में खाना खाने को  बोला

पर एक रिसर्च साफ़ साफ़ कहती है की दिन में सिर्फ दो बार भोजन करने से इन्सुलिन रेजिस्टेंस या मधुमेह टाइप 2 में सुधार आता है.

ये रिसर्च [] कहती है

दिन में सिर्फ दो बार भोजन करने से ग्लूकोज लेवल और इंसुलिन रेजिस्टेंस कम हो जाता है। दिन में कई बार खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है।

इस रिसर्च का फ्लो नीचे दे रहा हु. आप देख कर ही समझ जायेंगे की कैसे उलटी गंगा बहाई जा रही है.

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे

इसलिए इस रिसर्च को समझ कर आपको ग़ुस्सा आना स्वाभाविक है की आखिर मुझे ६-७ बार खाने का बोल कर मेरे शरीर में इन्सुलिन बार बार क्यों बढ़ने की कोशिश हुई. क्या ये सही नहीं होता की पहले दिन ही डॉक्टर मुझे बोल देता की आपको दिन में दो से ज्यादा बार नहीं खाना खाना खाना है?

मैं और मेरे जैसे लाखो लोग ऐसी बुरी स्थिति में जाने से बच जाते।

फैट के बारे में झूट

मधुमेह रोगियों के लिए फैट खराब नहीं होता है। ये भी मुझे रिसर्च से मालूम चला. 

जी हां. मुझे तो पहले दिन से ही  ये कहा गया की फैट बुरा है. सभी को ये बात बोली जाती है.

पर रिसर्च ये कहता है की फैट बुरा नहीं बल्कि अच्छा है.

आखिर क्यों?

क्योकी फैट जब आप खाते है तो आपके शरीर में इन्सुलिन नहीं बढ़ता।

कार्बोहायड्रेट खाने से बढ़ता है.

हाँ यहाँ पर एक बात ध्यान देने योग्य है. की हर फैट[] अच्छा नहीं होता शरीर के लिए. उदाहरण के लिए अगर आप रिफाइंड आयल खाएंगे जो सैचुरेटेड फैट से भरा होता है तो वो नुक्सान करेगा। पर अगर आप मोनोअनसैचुरेटेड  या अनसैचुरेटेड फैट जैसे घी खाएंगे तो अच्छा रहेगा। क्योकी घी में ओमेगा ३ होता है जो शरीर के लिए और ह्रदय या दिल के लिए अच्छा होता है.

पर कुछ भी हो याद रहे की फैट ज्यादा खाने से भी मोटापा बढ़ता है. पर फैट नार्मल मात्रा में खाने से कोई नुकान नहीं बल्कि फायदा ही होता है.

आपको आश्चर्य होगा की कीटो डाइट जो पूरी तरह  पूरी तरह फैट आधारित डाइट है, डायबिटीज में बहुत फायदेमंद साबित हुई है. खैर उसपर चर्चा कभी और करेंगे। अभी तो ये समझ लीजिये की आपको फैट से नहीं डरना। आपकी दिन की कैलोरी रेक्विरेमेंट के अंदर फैट अगर खाते है तो वो डायबिटीज में फ़ायदा ही करेगा.

फैट से इन्सुलिन स्पाइक्स नहीं  होती.इसलिए इन्सुलिन रेजिस्टेंस भी नहीं बढ़ता।

पर फिर मुझे तो ये ही बताया गया था की फैट्स से दूर  रहे.मैंने तो लगभग ५ सालो तक फैट को सिर्फ नफरत करी. और फिर भी वजन बढ़ा.

घी मेरे लिए अच्छा है? अविश्वसनीय.

पिछले 5 सालों से मैं इससे पूरी तरह से परहेज कर रहा हूं।

हम एक प्रसिद्ध ब्रांड का उपयोग कर रहे थे एक खाना पकाने के तेल के रूप में सोया से बना है । और मैंने जो पाया की सोया बेकार था ।

मूंगफली या सरसो (सरसों) तेल पर वापस जाएं जो कोल्ड प्रेस होता है.

घी नियमित रूप से खाएं क्योंकि यह एकमात्र शाकाहारी स्रोत है जिसमें ओमेगा 3 है और एक भारतीय होने के नाते भले ही आधा चम्मच हो, खा ही सकता हु. लेकिन, दिन की टोटल कैलोरीज का ध्यान भी रखना है. उससे ज्यादा कुछ भी खाया तो वजन और डायबिटीज बढ़ेंगे ही.

कार्बोहाइड्रेट हत्यारे है.

कार्बोहाइड्रेट हत्यारे हैं। कार्बोहाइड्रेट खाते हुए आप डायबिटीज का इलाज नहीं कर सकते और न ही डायबिटीज को रिवर्स कर सकते है. 

एक रिसर्च [6] में मरीजों के दो समूह बनाये गए.

एक समूह को कुछ हफ्तों के लिए बिना कार्बोहायड्रेट वाले आहार पर रखा गया. दुसरे समूह को पूरी तरह कार्बोहायड्रेट वाले आहार पर रखा गया.

ये देखने के लिए की किसका वजन बढ़ता है और किस्मे इन्सुलिन प्रतिरोध ज्यादा होता है.

आपको क्या लगता है? फैट वालो का बुरा हाल होगा।

नहीं।

आश्चर्य आश्चर्य आश्चर्य

जिस समूह ने फैट भरा आहार खाया उनमे फैटी लिवर , इन्सुलिन प्रतिरोध और वजन बढ़ने जैसी समस्याओं में सकारत्मक सुधार देखने को मिला।

जबकि फैट-प्रतिबंधित डाइट ग्रुप में सरे लक्षण उलटे थे. उन्हें नुक्सान हो रहा था.

नीचे दिए गए परिणाम देखें [6]

सभी वसा आहार इंसुलिन और मधुमेह को नियंत्रित करता है

वाह. मुझे जो डाइटीशियन डाइट प्लान बता रहा था उसमे तो ६०% कार्बोहायड्रेट ही था. आखिर क्यों मुझे उल्टा बताया गया?

क्या ये सब चाल है कंपनियों का पैसा बनाने की ? या ये अपडेटेड रेसर्चेस का डॉक्टरों को पता नहीं इस कारन से हो रहा है?

ये निर्णय मैं नहीं कर सकता.

सच कड़वा है

मैं जानता हूं कि मैं एक डॉक्टर नहीं हूं और न ही मैं एक डाइट प्लानर के रूप में उस वक्त प्रशिक्षित था. पर सच सच होता  है.उससे मुँह नहीं फेरा जा सकता।

आपको मैंने अपना अनुभव बता दिया। निर्णय आपको

संक्षेप में नीचे फिर से बता रहा हु की क्या करे और क्या न करे.

1- दिन में कई छोटे भोजन खाना बंद करें। सिर्फ दो बार या एक बार खाएं। और अगर बाकी समय भूक सहन नहीं होती तो कुछ ऐसा खाये  पिए जिससे इन्सुलिन ना बढे. 

2- आलस छोड़ दे. बहुत एक्सरसाइज न सही पर आप कम से कम दिन में ५-६ किलो मीटर चले. शुरुआत में दिक्कत होगी। पर धीरे धीरे मजा आने लगेगा। 

3- मैंने दवाइया लेना स्टेप बाई स्टेप बंद किया। मैं ये साल आपको नहीं दे  सकता.पर अगर आप पहले हफ्ते कार्बोहायड्रेट कम खाये, और चलना और एक्सरसाइज शुरू कर दे तो आपका ग्लूकोस लेवल वैसे ही कम रहने लगेगा। तो आप डॉक्टर से सलाह ले कर दवाई में बदलाव कर सकते है. 

4- कार्बोहायड्रेट लेना बंद करे. मैंने १ साल हो गया रोटी चावल नहीं खाये। यकीन मानिये एक भारतीय होने के नाते आपके पास हज़ारो ऐसे व्यंजन है जो कार्बोहायड्रेट में बहुत कम  है.फिर भी अगर ये नहीं छूट पा रहे तो जितना हो सके कम करे. सलाद, दाल, मक्खन, घी इत्यादि  खाये. एक मजेदार बात बताता हु. जो भारतीय घरो में सब्जी बनती है वो बेस्ट है. उसमे नुट्रिएंट्स बहुत होते है, वसा और प्रोटीन हो सकता है पर कार्ब्स बहुत कम या ना के बराबर होते है. 

5- बिना दूध और शक्कर की चाय पी सकते है तो  पिए.क्योकी आप दिन भर कुछ नहीं भी खाये पर दूध वाली चाय का एक कप भी आपके शरीर में इन्सुलिन बढ़ा सकता है. मैं बिना शक्कर दूध के कॉफ़ी पीता  हु. चाय भी बिना दूध शक्कर के।  शुरुआत में दिक्कत होती है पर बाद में आदत हो जाती है. जिन्दा रहने के लिए इतना तो कर ही सकते है. 

६-  २४ घंटो में कम से कम एक बार तो १३ घंटे भूखे  रहे. अगर आप शुगर की दवाई लेते है तो डॉक्टर की सलाह पर दवाइयों के समय को एडजस्ट कर सकते है. क्योकी १३ घंटे में रक्त में ग्लूकोस कम हो जाता है और फिर आपका लीवर ग्लाइकोजन को ग्लूकोस बना कर रक्त में ग्लूकोस की मात्रा को बैलेंस रखता है. इससे लिवर को भी फ़ायदा होता है. 

७ – कम से कम ५-६ घंटे की बिना रुके अँधेरे में नींद. आप कहेंगे की सब तो  ८-९ घंटे सोने की सलाह देते है. पर यहाँ ये समझना जरूरी है की हर किसी के शरीर को नींद की जरूरत अलग अलग है. मेरा काम ५ घंटे की नींद में बढ़िया चल जाता है. आपको अपना पता होना चाहिए। ये बहुत जूरी है. ज्यादा या कम सोना दोनों ही नुक्सान करता है.

८- आपको एक बात का विशेष ध्यान रखना  होगा.आपकी डेली कैलोरी की जरूरत कितनी है उसको आपको एक बार तो भी नाप कर कही लिखना होगा। और फिर आप रोज जो भी कहते है उसको उस कैलोरी के हिसाब से खाये. अगर आप जरूरत से ५०-१०० कैलोरीज कम खाएंगे तो भी फ़ायदा  होगा.पर जरूरत से ज्यादा ना खाये।

९-  बनते कोशिश कार्ब फ्री रेसिपीज (carb free recipes) ही खाने में प्रयोग करे. या लौ कार्ब (low carb recipes) रेसिपीज खाये।

मधुमेह टाइप 2 कैसे रिवर्स करे ये समझने के बाद आपको उत्सुकता जरूर हो रही होगी की अब मेरी स्थिति का  क्या है.

तो ये आर्टिकल लिखे जाते वक़्त मेरे पैरामीटर्स निम्नलिखित थे.

1- मेरा ग्लूकोज स्तर  कभी भी 120 से ऊपर नहीं जाता है।
2-मेरा H1B1c 6 के आसपास है
3- शारीरिक स्टेमिना पहले से कई बेहतर है. बिना रुके १० किलोमीटर चल लेता हु और साँस भी नहीं फूलती।
4- नकारत्मकता ख़तम हो चुकी है. समस्याओ का अच्छी तरह सामना करता हु.
5- त्वचा का ढीलापन ख़तम हो गया है. ५० की उम्र में ऐसा होने लगे तो क्या बुरा है.
6- मैं सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ हूं और दूसरों की मदद कर रहा हूं। मैंने कारपेंटरी ,प्लंबिंग , इनडोर खेती सीखी और डाइट प्लानिंग में डिप्लोमा भी हासिल किया । एक आईटी प्रोफेशनल होने के साथ मई अपने घर की हर मरम्मत , फर्नीचर बनाने का काम खुद कर लेता हु. बहुत पैसे बचते है.
7- ब्लड प्रेशर जो पहले औसत 210/110 रहता था अब 140/90 तक रहता है.
८ – कोलेस्ट्रॉल का स्तर एकदम सही रहता है.
९- मेरा पाचन सुधर गया है.
१०- हार्ट बीट ७० के नीचे रहती है.
११-लकवे की सारी कमजोरी कब गायब हो गयी पता नहीं चला.
१२- वजन १०२ से घट क्र ८४ रह गया. 

References:

[१] Harward School Publication: Type 2 Diabetes Mellitus

https://www.health.harvard.edu/a_to_z/type-2-diabetes-mellitus-a-to-z

[२] डॉ. फंग:  Towards Reversing Type 2 Diabetes

https://medium.com/@drjasonfung/towards-reversing-type-2-diabetes-9f693f964f90

[3] https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/11574431/

[4] https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4079942/

[5] https://www.diabetes.org/nutrition/healthy-food-choices-made-easy/fats

[६] 1906-P: Effects of a Carbohydrate-Restricted Diet on Hepatic Lipid Content in Adolescents with Nonalcoholic Fatty Liver Disease

https://diabetes.diabetesjournals.org/content/68/Supplement_1/1906-P?utm_source=TrendMD&utm_medium=cpc&utm_campaign=Diabetes_TrendMD_0